रविवार, 7 फ़रवरी 2010

हिंदी की व्यथा

हिंदी की व्यथा




संवेदना की परागरज ले


ककहरे ने गर्भ धरा था


शब्दों के भ्रूण पनपे


तो,


भाषा ने खोला नयन था


आशा की ओढ़ चुनरी


हिंदी का हुआ आगमन था


हास,


परिहास,


कथा,


कविता,


लोरी से भरा बचपन था


बन गई


उपन्यास,


ग़ज़ल,


रुबाई

आ गया भरपूर यौवन था


आंचल में भर के सोलह कलाएं,


छा गया

अल्हड़पन,

लड़कपन,

बांकपन था


भाषा की सभी विधाओं से पूर्ण उसका जीवन था


पर जबसे किया उसने अंग्रेजी का वरण था


हो गया शुरू उसका चरित्र हनन था


दिल बदले,

दौर बदले,

गया बदल उसका आचरण था


खो गया उसका मीठापन था


एक वाक्य भी अंग्रेजी बिना चल न सकी वो


आ गया जीवन में खोखलापन था


बिगड़ने लगा उसका संतुलन था


सो कम हो गया उसका चलन था


क्योंकि अंगरेजी की बैसाखियों पे

टंगा उसका लूलापन था

क्यों भूल गयी मैं, आप, हम सब


क्यों किया उसपर इतना दोषारोपण था


जिसने इतनी खूबसूरती से

खोला इस दुनिया में नयन था

उसे उपहार में हमने ही तो दिया

ये अपाहिजपन था.


तस्वीर मेरी बेटी शाश्वती ने बनाई है

22 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी की अपनी व्यथा है जो अन्यथा भी नहीं है.

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  2. हिंदी की व्यथा पे आपकी यह रचना बहुत अच्छी लगी...

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  3. इस कविता में आपने हिंदी के उद्भव और विकास को ब्रीफ में बुना है. इसके सौन्दर्य और तत्वों का वर्णन बखूबी किया है और अंत में हिंदी के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को भी रेखांकित करने में सफल रही हैं. एक सार्थक कविता बधाई.

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  4. जिसने इतनी खूबसूरती से
    खोला इस दुनिया में नयन था
    उसे उपहार में हमने ही तो दिया
    ये अपाहिजपन था.

    सच कहा हमने ही मिल कर हिन्दी को अपाहिज बना दिया है ....... आजकल के बच्चे हिन्दी के शब्द का मतलब भी अँग्रेज़ी शब्दों से सीखते हैं ....... प्रभावी लिखा है .......

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  5. जिसने इतनी खूबसूरती से

    खोला इस दुनिया में नयन था

    उसे उपहार में हमने ही तो दिया

    ये अपाहिजपन था.

    हिंदी की व्यथा को सटीक शब्द दिए हैं....सच है की आज हमने हिंदी जैसी वैज्ञानिक भाषा को बैसाखियाँ थमा दी हैं...बहुत अच्छी रचना लिखी है...

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  6. सोचने पर मजबूर कर रही है आपकी यह रचना, रचना जी ।
    हिंदी की व्यथा की सही रूप में व्याख्या।

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  7. Rachna...aapne bahut khoobsoorati ke saath hindi ka haal-e-dil bayan kiya hai.....Bhasah koi bhi buri nahi...angreji bhi nahi...lekin maansikta ek prashna avashya hai...angreji shabdkosh mein bhi hindi ke shabdo ko joda gaya hai aur ja bhi raha hai.....

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  8. badalte daur mein sabhi bhashon ka yehi hasra ho raha hai rachna ji ! hindi akeli nahi hai... sms ke yug ne angre ko jaisa bana diya hai angreji wale bhi dukhi hain...
    aapki rachna aur aapki chinta dono badhiya hain... lekin ab apni hindi vyapak ho rahi hai aur bajarikaran ke iss daur mein wo naye aayam gadh rahi hai.. naye shabdon ko aatma saat kar rahi hai.. pehli baar aapke blog par aaya ... aapki sabhi rachnaayen badhiya hain !

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  9. सोचने पर मजबूर कर रही है आपकी यह रचना

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  10. shabdo ne kamaal kar dikhaya aur hindi ki anthvaidna ukar ayi.bahut acchhi aur prabhavi rachna.

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  11. ek saarthak rachna ,hindi ki chinta jayaj hai ,khushi hui ki hindi ke baare me itni gahrai se socha gaya ,nahi to ek hindustani hi aapas me ise nakara deta hai aur iska apmaan apne hatho karta hai .prabhavshaali rachna ,hindi par main bhi bahut pahle likhi rahi magar aap bahut vistaar se likhi hai iski vyatha ,man ko sparsh kar gayi .

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  12. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें !
    इस शानदार और उम्दा रचना के लिए बधाई!

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  13. मेरी तो यही शुभकामना है -
    इस रचना को पढ़नेवाले हर व्यक्ति को
    इससे वैसी प्रेरणा मिले,
    जैसी रचना जी चाहती हैं!

    --
    कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "मेरे लिए,
    नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
    --
    संपादक : सरस पायस

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  14. बेटी शाश्वती द्वारा बनाई गई तस्वीर बहुत सुंदर लग रही है!

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  15. mai pahalee var hee aapke blog par aaee hoo par rachana pad kar laga der aae durust aae . Bahut
    bhavnatmak aur kalatmaktareeke se aapne hindi kee vyatha ko racha hai . Tareefe kabil kavita .

    Aabhar !

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  16. हिंदी के दर्द को व्यक्त करती एक सुंदर रचना ।

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  17. पर अफ़सोस, ऐ इंसान
    तू तो पूरा पत्थर भी न हुआ.
    Prabhavpurn rachna. Hindi vyatha ko sahi ujagar kiya aapne.
    Bahut badhai....

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  18. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

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  19. बहुत सही लिखा....

    जिसने इतनी खूबसूरती से

    खोला इस दुनिया में नयन था

    उसे उपहार में हमने ही तो दिया

    ये अपाहिजपन था.

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  20. हिंदी के दर्द को अच्छा रचा आपने. कई बार व्यथा भी कथा बन जाती है.

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