गुरुवार, 12 नवंबर 2009

ऊँची उड़ान


ऊँची उड़ान




  
इस आसमां को छूने की हसरत रही है दिल में


मैं पांवों पे उड़ के जाऊं, हाथों को भी बढाऊँ


जितना भी पास जाऊं, वो दूर ही रहा था


गर्दन उठायी जब भी, वो उड़ता ही जा रहा  था


मैंने उड़ना नहीं था सीखा, सो दूर जा गिरी थी


बैसाखियों के बल पर, कुछ पाना नहीं है सीखा


बेबस खड़ी थी मैं, यूँ हवा में कोहनियाँ टिकाये


कि चुपके से कोई बोला


आसमां को पहले सिर्फ तू छूना ही चाहती थी


अब सिर्फ आसमां को छूना मकसद नहीं है तेरा


आसमां है ऊँचा कोई बात अब नहीं है


आसमां को छूने का सवाल ही नहीं है


अब आसमां को मैं पाना ही चाहती हूँ


उस को पाकर आजमाना भी चाहती हूँ


क्यों, दूसरो के आसमां, में तारे बहुत हैं ज्यादा


क्यों मेरे आसमां  में एक चाँद भी नहीं है


कानों में शोर कैसा?


क्या, कुछ पा लिया है मैंने?


ये जोशे जुनूं, मेरे जिगर का ही असर है


कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है


ये उँगलियों का मेरे चुम्बक सा, असर है


कि आसमां खिंचा सा मेरी ओर आ रहा है


मैंने उसको पा लिया है उसने मुझको पा लिया है

16 टिप्‍पणियां:

  1. कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है
    ये उँगलियों का मेरे चुम्बक सा, असर है
    कि आसमां खिंचा सा मेरी ओर आ रहा है
    मैंने उसको पा लिया है उसने मुझको पा लिया है

    रचना जी आपकी टिप्पणी ने स्त्री मन को फिर आहात किया .....भले ही कुछ देर हम ये वहम पाल लें कि आसमां हमारी बाँहों में है ....पर ये वहम ही तो है ....आखिर फिर वही धरातल होता है और हम यूँ ही बाहें फैलाये .....!!

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  2. यही जूनून तो चाहिए सब में...बहुत सुन्दर कविता

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  3. कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है
    ये उँगलियों का मेरे चुम्बक सा, असर है
    कि आसमां खिंचा सा मेरी ओर आ रहा है
    मैंने उसको पा लिया है उसने मुझको पा लिया है
    hausalo ki udaan barkrar rahe sada ,bahut shaandar rachna .

    उत्तर देंहटाएं
  4. ये जोशे जुनूं, मेरे जिगर का ही असर है


    कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है

    vaah bahut sundar ye josh banaa rahe aasheervaad

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  5. ये जोशे जुनूं, मेरे जिगर का ही असर है


    कि आसमां पिघल कर नीचे को आ रहा है

    सुन्दर पंक्तियाँ.

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  6. कि आसमां खिंचा सा मेरी ओर आ रहा है
    मैंने उसको पा लिया है उसने मुझको पा लिया है
    एक सुन्दर रचना!
    महावीर शर्मा

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  7. बहुत ही सुंदर कविता, सब पंक्तियाँ पसंद आई.

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  8. रचना जी ,
    सोच से ही बदलती है दुनियाँ .

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  9. नहीं आसमां से नहीं कम है इन्सां
    नमन आसमां भी रचना को करता.

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  10. बहुत सुन्दर अहसास लिए रचना..
    सुन्दर प्रस्तुति...
    :-)

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  11. वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  12. बहुत खूब! बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...

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